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सिस्टम का सिस्टम

पड़ी कुँए में भांग है, भली करे करतार
होरी के घर लूट में, मुखिया हिस्सेदार
मुखिया हिस्सेदार, शिक़ायत किससे करता
आखिर थाने में जा पहुँचा डरता-डरता
लिखा रपट में गया, रुपैये गए जुए में
मिला उसे यह ज्ञान, भांग है पड़ी कुँए में

✍️ चिराग़ जैन

तुम लोगों की अनदेखी

छिछले बोल लुभाते हैं
नारे हिट हो जाते हैं
दोहरे अर्थ समेटे हेडिंग
मिलियन व्यू पा जाते हैं
फिर कहते हो मंचों से क्यों कविता अंतर्धान हुई
तुम लोगों की अनदेखी के कारण लहूलुहान हुई

सीधी-सादी कविता वाली पोस्ट कहीं खो जाती है
नोकझोंक की क्लिप दिखते ही शेयर कर ली जाती है
गीत सिसकते रहते हैं
छंद बिलखते रहते हैं
कविता-साधक फॉलोवर का
रस्ता तकते रहते हैं
जो शालीन रहा हो उसकी वॉल बहुत वीरान हुई
तुम लोगों की अनदेखी के कारण लहूलुहान हुई

सेंसेशन, वल्गर, फूहड़ता, इन पर सबका ध्यान हुआ
भद्दी बातें करती छोरी का जी भर गुणगान हुआ
अंधी हिंसक सोच चली
गाली और गलौज चली
नेगेटिव का बल देखो
वायरलियों की फौज चली
सभ्य सुसंस्कृत पोस्ट करी तो कचरे का सामान हुई
तुम लोगों की अनदेखी के कारण लहूलुहान हुई

ट्रोलिंग करते फिरते हैं सब अपने-अपने वाद लिए
मानवता एकाकी फिरती, अंतस में अवसाद लिए
जितना शिष्ट प्रलाप हुआ
उतना पश्चाताप हुआ
ओछापन तो ट्रेंड बना
गहरा लिखना पाप हुआ
चोरी करने की आदत भी ईश्वर का वरदान हुई
तुम लोगों की अनदेखी के कारण लहूलुहान हुई

✍️ चिराग़ जैन

माई लाॅर्ड

महिला का एक बयान
आपको
जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकता है;
इसलिए
शरीफ़ आदमी
महिला से पंगा लेने से डरता है।

…लेकिन अपराधी नहीं डरता
अपराधी तो
सबको एक नज़र से देखता है
आदमी-औरत, सवर्ण-दलित
ऊँच-नीच, छोटा-बड़ा;
इन सबसे अपराधी को क्या मतलब पड़ा?

अपराधी
लिंग और जाति देखे बिना
सीधा अपराध पर आता है;
इसलिए झट से अपराध कर जाता है।
लेकिन क़ानून झट से न्याय नहीं कर पाता है।
क़ानून को सब कुछ देखना पड़ता है;
इसलिए अपराधी ख़ुद को
निर्दोष साबित करने की बजाय
केवल कमज़ोर साबित करता है।
कमज़ोर साबित होते ही
न्याय उसके पक्ष में झुक जाता है
और निष्पक्षता की उम्मीद का पहिया
रुक जाता है।

इसीलिए
शरीफ़ आदमी कचहरियों से डरता है
और अपराध;
(चाहे दाएँ कठघरे में खड़ा हो या बाएँ में)
झुके हुए क़ानूनों के दम पर अकड़ता है।

शराफ़त का तो पता नहीं माई लॉर्ड!
पर बेईमानी को पहचानना
बेहद आसान है
जो अपनी कमज़ोरी का कार्ड दिखाकर
ख़ुद को ईमानदार साबित करे
वह सबसे बड़ा बेईमान है।

✍️ चिराग़ जैन

अनकहे

जो कथाओं की दिशाएं मोड़कर ओझल हुए हैं
उन अभागे अनकहों का मन नहीं जाना किसी ने
दोष सारा जो लिए बैठे रहे अपने सिरों पर
उन चरित्रों का अकेलापन न पहचाना किसी ने

कैकयी की सोच में जो क्षोभ था, वो बाहर आया
लोभ रानी का जगा, तब राम ने वनवास पाया
कैकयी ने कर लिया वरदान को अभिशाप ख़ुद ही
मंथरा के भाग्य में अपयश रहा, वो भी पराया
राजपरिवारों की झूठी प्रीत का जिसमें दिखा सच
मंथरा तो थी वही दर्पण, नहीं जाना किसी ने

पुत्र का संबंध लेकर भीष्म ख़ुद गंधार आए
दम्भ में इक बालिका के स्वप्न सारे मार आए
जिस अंधेरे को तुम्हीं ने राज्य से वंचित किया था
उस अंधेरे पर किसी की राजकन्या वार आए
कौन से अन्याय की ज्वाला में शकुनि जल रहा था
हाल उसका पूछने कब लौटकर आना किसी ने

नाव का जीवन बचाने क्या सहेगी पाल पूछो
धार से घायल हुआ है चप्पुओं का भाल पूछो
आम के मीठे फलों पर मुग्ध रहते हो, रहो पर
हो सके तो आम्रवन की कोयलों का हाल पूछो
भूमिका अपनी निभाकर खो गए नेपथ्य में जो
उन अबोलों का भला गुणगान कब गाना किसी ने

✍️ चिराग़ जैन

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