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देशगीत

नाम रहेगा शेष हमारा सर्वोत्तम परिवेश हमारा दुनिया का हर रंग यहाँ है ऐसा अनुपम देश हमारा आज़ादी के नग़मे गाकर, देशप्रेम की अलख जगाकर स्वाभिमान हित जी लेते हैं, सिर्फ़ घास की रोटी खाकर पल भर में तलवार हमारी हो सकती है खूं की प्यासी पल भर में ही हो सकते हैं, शस्त्र त्यागकर...
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