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झाँसी की रानी

उन हाथों में बिजली की तेज़ी थी; तलवारों से पूछो दुर्गा का साक्षात रूप थी; युग के हरकारों से पूछो आँखों में अंगार, पीठ पर ममता लेकर ऊँचाई से कैसे कूदी थी इक रानी; जाकर दीवारों से पूछो हिम्मत की राहों में जब भी आईं तो चुक गयी दीवारें कैसे कूदेगी अम्बर से रानी; उत्सुक भयी...

देशभक्ति

कैसे इस पर न्यौछावर हो अपना ख़ून-पसीना सीखें वक़्त पड़े तो फौलादी साबित हो हर इक सीना, सीखें शीश कटे तो उसका, जिसने भारत-भू पर आँख उठाई हम इस पर मरना क्यों चाहें, इसकी ख़ातिर जीना सीखें ✍️ चिराग़...

कैसे लिखूँ

मस्त था मैं, भ्रमर-सा दीवाना था मैं, लेखनी प्रेयसी बन गई थी मेरी ऑंसुओं की अमानत संजोई बहुत, जुल्म से जंग-सी ठन गई थी मेरी एक दिन प्रेयसी मुझसे कहने लगी- “मेरे प्रीतम ये क्या कर दिया आपने मेरे बचपन को क्यों रक्त-रंजित किया, मांग में रक्त क्यों भर दिया आपने क्यों...
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