+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

फूल का क़त्ल

हार का ख़ौफ़ गुनहगार बना देता है जीत की चाह कभी वार नहीं कर सकती हाथ वहशत की ग़ुलामी पे अड़े थे, वरना फूल का क़त्ल तो तलवार नहीं कर सकती बेच दी होगी चकाचौंध में ग़ैरत उसने भूख इंसान को ग़द्दार नहीं कर सकती रौशनी नूर तो आलम पे लुटा सकती है पर अंधेरे को गिरफ़्तार नहीं कर सकती...
error: Content is protected !!