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झाँसी की रानी

उन हाथों में बिजली की तेज़ी थी; तलवारों से पूछो दुर्गा का साक्षात रूप थी; युग के हरकारों से पूछो आँखों में अंगार, पीठ पर ममता लेकर ऊँचाई से कैसे कूदी थी इक रानी; जाकर दीवारों से पूछो हिम्मत की राहों में जब भी आईं तो चुक गयी दीवारें कैसे कूदेगी अम्बर से रानी; उत्सुक भयी...
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