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रहिमन काग़ज़ राखिए…

कई बार ऐसा महसूस होता है कि धरती पर हमारा जन्म ही केवल काग़ज़ सम्भालने के लिए हुआ है। आपके पास काग़ज़ हैं, तो सब कुछ है। आपके पास घर है, लेकिन घर के काग़ज़ नहीं हैं तो भले ही आप महल में रह रहे हो, सरकार के लिए आप बेघर हो। लेकिन सड़क पर रहनेवाले बेघर के नाम की, किसी...

भारतीय राजनीति : एक निबंध

भारतीय राजनीति में दो पक्ष होते हैं। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे की दृष्टि में विपक्ष होते हैं। भारत की राजनीति एक सधे हुए नाटक की तरह है जिसकी बाकायदा एक पटकथा है। इस पटकथा में हर पक्ष के अलग-अलग संवाद हैं। पाँच साल में एक बार मतदान की पर्चियों से यह तय किया जाता है कि...

सड़क सौन्दर्य

देश की यातायात व्यवस्था देखकर मेरा मन श्रद्धा से भर जाता है। पूरी दुनिया सड़कों के रास्ते दफ्तर पहुँचती है और दफ्तर पहुँचकर चुनौतियों से जूझने लगती है। हम भारतीय चुनौतियों से जूझते हुए दफ्तर पहुँचते हैं और दफ्तर पहुँचकर चैन की साँस लेने लगते हैं। अन्य देशों के लोग...

रुपया क्यों लुढ़कता है

जो लोग रुपये के गिरने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, उन्हें मैं साफ़-साफ़ बता देना चाहता हूँ कि रुपया सरकार के कारण नहीं, तुम्हारी फटी हुई जेब के कारण गिरता है। यदि तुमने अपनी जेब सिल ली होती तो रुपया नहीं गिरता। सरकार उचित नीतियां बनाकर सारा रुपया अपने पास...

मास्टर स्ट्रोक से सारे प्रदूषण पर लगाम

पुराने समय में किसी नगर में एक यशस्वी राजा राज्य करता था। एक बार सभी राजकीय कर्मचारियों ने राजा की महा आरती का आयोजन किया। राजकाज के सभी कर्मचारी अपने-अपने विभाग के बजट के अनुरूप दीप, धूप, लौबाण, गुग्गल और न जाने कितनी ही सामग्री बटोर लाए। आयोजन बहुत भव्य था। धूप के...
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