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अलविदा 2015

दो हज़ार पन्द्रह में किसने कैसा-कैसा किया कमाल पाँच मिनिट में दिखलाता हूँ आओ तुमको पूरा साल शुरू हुआ जब साल तो बीजेपी के दिल पर था कुछ भार भूल नहीं पाए थे मोदी काश्मीर की आधी हार लेकिन तभी पढ़ा मोदी ने ऐसा इक अमरीकी मंत्र अतिथि बनकर आए ओबामा झूम उठा अपना गणतंत्र गली-गली...

सब कुछ सामान्य है

कल NDTV पर दिल्ली के मुख्यमंत्री जी का साक्षत्कार सुना। “आनंद आ गया” नही कह सकता क्योंकि भाजपाई नाराज़ हो जाएंगे; “सन्न रह गया” भी नहीं कह सकता क्योंकि आपिये नाराज़ हो जाएंगे। थोड़ी देर के लिये कांग्रेसी हो जाता हूँ और माथे पर त्यौरियाँ लिये मद्धम...

दूसरों के जूते में

जब मैंने कोशिश की दूसरों के जूते में पैर रखकर सोचने की तब मुझे एहसास हुआ कि जूते घिसना बेहतर है पैर छिलने से। ✍️ चिराग़...

बाजीराव मस्तानी

बाजीराव मस्तानी देखी। लोग इसे प्रेमकथा समझें लेकिन ये संबंधों के उस दर्शन की कथा है जिसको सहज अनुभूत करना भी मुश्किल है। ये इस बात का प्रमाण है कि हम अक्सर ऐसी स्थिति में जी रहे होते हैं, जहाँ कोई भी शख़्स ग़लत नहीं होता, लेकिन हम अक्सर ये भी मान रहे होते हैं कि सब ग़लत...

नया पड़ोसी

पिछले महीने नया पड़ोसी आया है। दुश्मन लगता है पिछले जन्म का। कमबख्त पुराने गानों का शौक़ीन है। रोज़ रात दुनिया भर के सोने के बाद युद्ध शुरू करता है। कभी रफ़ी, कभी हेमंत, कभी लता। ख़ुद तो सो जाता है आध-पौन घंटे में लेकिन उसे क्या पता क्या क्या गँवा बैठता हूँ मैं रोज़ रात।...
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