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स्वीकार

बरसों से बरसते हैं अब क्या असर करेंगे बेबस ये बसेरे हैं कैसे बसर करेंगे रुकती है नज़र जाकर चूते हुए छप्पर पे छप्पर को भी गिरा दो खुलकर सबर करेंगे ✍️ चिराग़...

हुनर

तनहा-तनहा था सफ़र क्या कहिए आपका साथ मगर क्या कहिए मुझको मूरत में कर दिया तब्दील तेरे हाथों का हुनर क्या कहिए ✍️ चिराग़...
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