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पैरा ग्लाइडिंग

दो घड़ी को मैं किसी आकाश के रोमांच की बांहें पकड़ कर; उस धरा द्वारा मुझे सौगात में सौंपे गए अविरल सुरक्षा भाव का अपमान कर आया; जो कि मुझको हर दफ़ा अस्थिर उड़ानों से पुनः नीचे उतर आने पे बढ़कर थाम लेती है। वे उड़ानें (मैं जिन्हें उन्माद में ऊँचाइयों पर ठहर जाने का तरीका मान...

ख़बर का असर

जेब में दस का नोट लेकर भीखू छोले-कुल्चे के ठेले पर पहुँचा और बोला- “दस रुपये के छोले कुल्चे दे दो।” ठेले वाला मुस्कुराकर बोला – “दस रुपये में छोले कुल्चे नहीं आते।” भीखू उदास होकर पान की दुकान तक आया और टीवी पर चल रहा न्यूज़ बुलेटिन देखने...

पिताजी की भाषा की अलंकारिकता

यद्यपि उन गद्यांशों में मेरी कभी बहुत रुचि नहीं रही तथापि उनको सुनना मेरी विवशता है क्योंकि उनके वाचक मेरे पिताजी हैं, जो स्वयं को पूज्य बनाने की जुगत में समय की सूक्ष्मतम इकाई में भी मुझे प्रवचन पेलने से नहीं चूकते। गत 32 वर्ष में से प्रारम्भ के 4-5 वर्ष छोड़कर;...

डिग्रियों का बोलबाला

देश में डिग्रियों का बोलबाला है। कोई प्रधानमंत्री से डिग्री मांग रहा है तो कोई डिग्री से प्रधानमंत्री। ऐसे में मैं स्पष्ट कर दूँ कि डिग्री देखने की ललक छोड़ कर काम की क्षमता पर ध्यान दो। प्रोडक्टिविटी और केपेसिटी हो तो डॉक्टरेट की डिग्रियाँ पांचवी फेल डिग्रीलेस को सलाम...
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