व्यवहार
विवाद होने से अधिक निराशाजनक है, व्यवहार समाप्त हो जाना!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
विवाद होने से अधिक निराशाजनक है, व्यवहार समाप्त हो जाना!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
ख़ुद अन्धेरे में रहकर ही
प्रकाशित करता है औरों को
…कैमरा।
लेकिन जैसे ही कोई किरण
रौशन करने आती है
कैमरे को…
…तो इसे
अंधियारी लगने लगती है
सारी दुनिया।
बिल्कुल इंसान की तरह है
कैमरा भी
…ओछा कहीं का!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
एक ख़बर- वाराणसी में गंगा आरती के दौरान बम धमाका!
टिप्पणी- कभी दीवाली मनाई हो तो पता चले, लक्ष्मी पूजन के समय आतिशबाज़ी नहीं की जाती।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Jainism, Poetry
महावीर स्वामी की पुरातन परंपरा के
वर्तमान युग में निशान देख लीजिए
संत के समागम का कैसा है प्रभाव आज
सज उठा कैसे बियाबान देख लीजिए
आभा का प्रभाव है या तप का चमत्कार
सबके दुखों का है निदान देख लीजिए
जहां-जहां चरण पड़े हैं दिव्य श्रमणों के
वहां-वहां तीरथ महान देख लीजिए
पुण्य का उदय है आपके हमारे जीवन में
ऐसे दिव्य पावन सुखद क्षण उतरे
धर्म की सभा में धार्मिकों का समागम है
जैसे महावीर का समोशरण उतरे
अहिंसा के बल पर शासन हो कैसे भला
धरती पे इसके उदाहरण उतरे
महावीर और महाप्रज्ञ की विरासत को
साथ लिए देखिए महाश्रमण उतरे
सादगी का नूर भी है, ज्ञान का कपूर भी है
अहिंसा का देते हैं पैग़ाम भी महाश्रमण
धर्मसंघ की कमान साधते हैं दिन-रैन
साधना में रहें आठों याम भी महाश्रमण
धर्म की पकड़ डोर, नापें धरती का छोर
घूमें गली-गली गाम-गाम भी महाश्रमण
कहाँ आखरों में बंध पाएंगे ऐसे महान
श्रमण; कि जिनका है नाम भी महाश्रमण
त्याग, तप, साधना से ऐसे हो गए प्रबल
कामना पे लगाते विराम भी महाश्रमण
भीतर से बाहर तलक दिव्यरूप संत
आत्मा भी, हाड़-मांस-चाम भी महाश्रमण
हर क्षण, हर पल, एक सा सलोना रूप
सुब्ह भी महाश्रमण, शाम भी महाश्रमण
जिसने समर्पण के झरोखों से निहारा
उसके लिए तो चारों धाम भी महाश्रमण
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
क़लम भी
कुछ कम नहीं है
कुदाल से।
…शायद
कुछ गहरी ही
चोट करती हो।
और यथार्थ
…यथार्थ तो
दास मात्र है
विचार का।
अनुचर है बेचारा
हाथ बांधे चलता है
विचार के पीछे-पीछे।
हिम्मत नहीं
कि एक क़दम भी
आगे निकल जाए!
…अवलम्बन चाहिए ससुरे को
विचार का।
✍️ चिराग़ जैन