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ख़रीददार

वेदियाँ बाज़ार में आ तो गई हैं किंतु फिर भी सिर्फ़ दौलत से इन्हें पाना अभी मुम्किन नहीं है हर गुज़रता शख़्स इनके दाम पूछेगा यक़ीनन हर किसी के हाथ बिक जाना अभी मुम्किन नहीं है हाथ में अमृत लिए धन्वंतरि आ ही गए हैं पर अमरता के लिए संग्राम होना है ज़रूरी हाँ, कई राजा उपस्थित...

घुटने

जिनकी पहचान थी ख़ुद्दारी, उन्हीं लोगों के हाथ तो हाथ मेरे यार, जुड़े हैं घुटने बात जब अपने पे आती है बदलते हैं उसूल पेट की ओर ही हर बार मुड़े हैं घुटने ✍️ चिराग़...
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