Protected: रावण का पश्चाताप
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Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Purushottam
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बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड
यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया
जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी
वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया
जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया
यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया
जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन
रक्षकुल के लिए वो काल सिद्ध हो गया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
धागेनातीनकगधिंन ताल चलती है, पर
सुर सारेगामापाधानीसा में समाय के
नूपुर छनन छन, घनन घनन घण्ट;
मृदंग बजत द्रुम द्रुम द्रुम गाय के
पंचम-निषाद तीव्र-कोमल से रंगे राग,
दुगुन-तिगुन ताल भेद समझाय के
विलग विलग स्वर गान बनते हैं,
जब सब एकरूप होते सम पर आय के
कभी सब त्याग वीतराग निज भान करे,
कभी योग हर रोग का निदान हो गया
कभी बुद्ध, कभी युद्ध, कभी रुद्ध, कभी शुद्ध;
कभी युद्ध जीतने के बाद ज्ञान हो गया
कभी ज्ञानियों का राजधानियों ने मान किया,
कभी प्रेम ज्ञानवान से महान हो गया
विषम-विषम मान्यताओं के समक्ष भी है
सम जो विधान वही संविधान हो गया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
इस हाथ बातचीत, उस हाथ घुसपैठ
गोल-गोल न घुमाओ सीधे-सादे सीन को
हाथ मिल जाने से न कमज़ोर मान लेना
जड़ से उखाड़ सकते हैं आस्तीन को
बड़े-बड़े कोबराओं को नचाना जानते हैं
फिर न उठाना पड़े हमें उस बीन को
भारत के वर्तमान पीएम को जान लेना
चाय में मिला के कहीं बेच न दे चीन को
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
यदि सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा तो
चैनलों पे रोज़ तीन-पाँच कौन करेेगा
पुलिस वुलिस सब ठीक काम कर लें तो
बड़े-बड़े झूठ भला साँच कौन करेगा
न्याय की व्यवस्था संविधान में करी है ऐसी
अब भला साँच पर आँच कौन करेगा
पैंसठ दिनों में बस इतना पता चला है
एक्टर के मामले की जाँच कौन करेगा
✍️ चिराग़ जैन
संदर्भ: सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई
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अपनी ही बात को उठाने से क्यों चूकते हैं
ऐसा कैसा शासन का डर है विपक्ष में
शासन को छोड़ कर आपस में लड़ते हैं
किसी भूत-प्रेत का असर है विपक्ष में
दुखती हुई क्या कोई रग सी दबी हुई है
नाम सुनते ही थर-थर है विपक्ष में
मुद्दों पे सही से बात करने से बचते हैं
लगता है कोई गड़बड़ है विपक्ष में
✍️ चिराग़ जैन
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