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अहंकार का अंत

बल के घमण्ड में नियम किये खण्ड-खण्ड, यही बल यश की कुदाल सिद्ध हो गया जिसको समझकर तुच्छ पूँछ फूँक दी थी, वह भी भयानक कराल सिद्ध हो गया जिसने भी टोका उसे घर से निकाल दिया, यही आचरण विकराल सिद्ध हो गया जिसको दशानन समझता था शक्तिहीन, वह वनवासी महाकाल सिद्ध हो गया ✍️...

संविधान

धागेनातीनकगधिंन ताल चलती है, पर सुर सारेगामापाधानीसा में समाय के नूपुर छनन छन, घनन घनन घण्ट; मृदंग बजत द्रुम द्रुम द्रुम गाय के पंचम-निषाद तीव्र-कोमल से रंगे राग, दुगुन-तिगुन ताल भेद समझाय के विलग विलग स्वर गान बनते हैं, जब सब एकरूप होते सम पर आय के कभी सब त्याग...

रावण

यदि अब राम की शरण में चला गया; तो मुझे मेरे भीतर का पाप मार डालेगा एकमात्र सधवा बचेगी मेरी पत्नी तो शेष विधवाओं का विलाप मार डालेगा जिनसे सुशोभित थी रावण की राजसभा उन रिक्त आसनों का शाप मार डालेगा मृत्यु जो करेगी वह जग को दिखायी देगा जीवन तो मुझे चुपचाप मार डालेगा जिस...

देश को महान कौन करता

यदि इतिहास वाले लोग हम जैसे होते बोलो दुविधाओं का निदान कौन करता झाँसी वाली रानी कर लेती समझौता गर राष्ट्र के निमित्त बलिदान कौन करता भगत भी चाटुकारों वाली भाषा सीख लेते भारतीयता पे अभिमान कौन करता नेताजी सुभाष औ पटेल होते स्वार्थी तो फिर मेरे देश को महान कौन करता ✍️...

तिरंगा

अपना तिरंगा एक परचम ही नहीं है भावनाओं की बहार-सी है तीन रंग में छोटे-छोटे बालकों के अधरों पे बिखरी जो वही एक पावन हँसी है तीन रंग में प्रेम, त्याग, एकता, अखण्डता, समानता से ओत-प्रोत आत्मा बसी है तीन रंग में खादी वाले मोटे रेशों का ही ताना-बाना नहीं भारत की एकता कसी...

ज़िन्दगी

दुनिया में आ के सकुचाई पल भर फिर ममता की छाँव में सँवर गई ज़िन्दगी पालना, खिलौना, पाठशाला, अनुभव, ज्ञान प्रेम की छुअन से निखर गई ज़िन्दगी क़ामयाबी का गुमान ज़िन्दगी पे लदा और ज़िन्दगी के दाता को अखर गई ज़िन्दगी मौत की हवा ने श्वास का दीया बुझा दिया तो हाड़-हाड़ राख...
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