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क्षोभ के वातावरण में

सभ्यताओं के क्षरण में क्षोभ के वातावरण में वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा व्यस्तताओं को हृदय का भान कमतर ही रहेगा मुद्रिका में प्रेम का क्षण तो सहेजा जाएगा पर भूल जाएगा मिलन के सौख्य को दुष्यंत इक दिन प्रीति की उजड़ी हुई क्यारी पुनः पुष्पित न होगी हर कथा है...
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