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समाधान

बहुत समझदार हो तुम! जब कभी उदासी का आँचल ओढ़कर जवान होने लगता है मेरा कोई दर्द तो चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के कंधा देकर …पहुँचा आते हो उसे वहाँ …जहाँ से लौट नहीं पाया कोई आज तक! ✍️ चिराग़...

आपदा-प्रबंधन

संकट हो कोई समक्ष खड़ा या फिर घिर आए युद्ध बड़ा जीवन की हर कठिनाई से मानव का पुत्र सदैव लड़ा मानवता का इक दिव्य भाव, अंतस् में धारण कर लेंगे आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे सागर ने लांघी मर्यादा सूनामी यम का रूप बनी भूकम्पों की मनमानी से जब धरा मृत्यु का कूप...
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