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रिक्शावाला

डरी-सहमी पत्नी और तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रहता है रिक्शावाला। बच्चे रोज़ शाम खेलते हैं एक खेल जिसमें सीटी नहीं बजाती है रेल नहीं होती उसमें पकड़म-पकड़ाई की भागदौड़ न किसी से आगे निकलने की होड़ न ऊँच-नीच का भेद-भाव और न ही छुपम्-छुपाई का राज़ ….उसमें होती...
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