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नफ़रतें

आइये, मिलकर बढ़ायें नफ़रतें चप्पे-चप्पे पर उगायें नफ़रतें धर्म अपना यूँ निभायें नफ़रतें एक दिन हमको ही खायें नफ़रतें प्यार, माफ़ी,अम्न और इंसानियत इन सभी को काट आयें नफ़रतें गर मुहब्बत की कोई बातें करे तो उसे ज़िन्दा जलायें नफ़रतें जिसने ये दुनिया बनाई प्यार से आओ, उसको भी...

जश्न को चीखों में बदला है

नई नस्लों को हमने ख़ुद गुनहगारों में बदला है हँसी को टीस में और जश्न को चीखों में बदला है जिन्हें पुरखों ने ख़ुश होने की ख़ातिर हमको सौंपा था उन्हीं मौकों को हमने जंग की वजहों में बदला है ✍️ चिराग़...
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