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लॉकडाउन की दिवाली

मार्किट ठंडा घर-घर मंदा जेब सभी की ख़ाली है चारों ओर दिवाला निकला कैसी आई दिवाली है कोरोना की दहशत ऐसी अबकी गिफ्ट नहीं आये इसके डिब्बे उसके घर में होकर शिफ्ट नहीं आये ख़ूब घुमंतू सोन पापड़ी घर पर बैठी ठाली है चारों ओर दिवाला निकला कैसी आई दिवाली है कोरोना ने लक्ष्मी जी...

इलेक्सन

क्या करना है कारोबार कल और इलेक्सन होंगे कल और इलेक्सन होंगे, घनघोर इलेक्सन होंगे हर ओर इलेक्शन होंगे, पुरजोर इलेक्शन होंगे सब कुछ मुफ्त मिलेगा यार कल और इलेक्सन होंगे एमपी वाले चावल देंगे, दिल्ली वाई-फाई पटना जाकर फोकट में ले लेंगे यार दवाई मेहनत के मुँह पर पोतेंगे,...

भोर से ठीक पहले

रेत, अंतिम बून्द भी यदि सोख ले अपनी नदी की साफ़ मतलब है पहाड़ों की बरफ़ अब गल चुकी है रात का अंधियार जब अपने चरम पर आ गया हो तब समझना, सूर्य की पहली किरण अब चल चुकी है त्यौरियों के बोझ से भौंहें भले दुखने लगी हों होंठ की बस एक हरक़त से हवा हो जाएंगी ये ये निराशा, ये...
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