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मुहाने तक नहीं पहुँची

किसी की ज़िन्दगी अपने ठिकाने तक नहीं पहुँची किसी की मौत ही वादा निभाने तक नहीं पहुँची बुज़ुर्गों की क़दमबोसी मेरी फितरत रही लेकिन मेरी हसरत कभी उनके ‘सिराने तक नहीं पहुँची ज़माने के लिए जो शख्स घुट-घुट कर मरा आख़िर ख़बर उस शख्स की ज़ालिम ज़माने तक नहीं पहुँची हवा के साथ उसकी...

हम हाथ मल रहे हैं

हमको हमारे ऐसे हालात खल रहे हैं रग-रग में बेक़ली के सागर मचल रहे है उनकी झिझक ने इतना लाचार कर दिया है सब हाथ में है फिर भी, हम हाथ मल रहे हैं ✍️ चिराग़...

भाग्यवाद

यहाँ प्रारब्ध का लेखा सिकन्दर तक ने भोगा है पड़ोसी की ख़ताओं को समन्दर तक ने भोगा है बहुत चाहा बचाना राम ने रावण को मरने से मग़र जो लिख गया वो तो कलन्दर तक ने भोगा है ✍️ चिराग़...
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