अनदेखी
देर तक देखता रहा मैं
एक बिन्दु को
आशा भरी नज़रों से
लगातार।
उतनी ही देर तक
तकती रहीं
दो आँखें
छलछलाती हुईं
मुझे भी!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
देर तक देखता रहा मैं
एक बिन्दु को
आशा भरी नज़रों से
लगातार।
उतनी ही देर तक
तकती रहीं
दो आँखें
छलछलाती हुईं
मुझे भी!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
होता तो यही है जी हर बार इलेक्शन में
पब्लिक को मनाती है, सरकार इलेक्शन में
जनता का ही पैसा है, जनता पे ही शासन है
जनता का ही होता है, व्यापार इलेक्शन में
कुछ झंडे उठाकर के, कुछ बिल्ले लगाकर के
बिन बात ही करते हैं, बेगार इलेक्शन में
कुछ रंगे सियारों ने, कुछ नंगे गरीबों के
बच्चों को लिया कैसे पुचकार इलेक्शन में
लीडर के कदम चूमें, ये लीपी हुई सड़कें
इनका तो हुआ ही है, उद्धार इलेक्शन में
हर दिल है महज दलदल, दिल्ली के दलालों की
कूदे तो भला कैसे, ख़ुद्दार इलेक्शन में
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
बड़ी अधूरी थी ये ज़िन्दगी जो अब न रही
तुम्हारा प्यार जो पाया तो कुछ तलब न रही
ग़ज़ल मैं तेरे अदब की मिसाल देता हूँ
तवायफ़ों के लबों पर भी बेअदब न रही
तुम्हारी ओर से भी नज़्ा्रे-इनायत तो हुई
मगर जब हमको ज़रूरत थी महज तब न रही
कोई उस जीत को पाकर भला करे भी क्या
जो जीत एक भी मुस्कान का सबब न रही
✍️ चिराग़ जैन