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सादगी

आधा मन लेकर विभीषण बनोगे ज्यादा मन लेकर रावण बनोगे सादा मन लेकर राम बन जाओगे ✍️ चिराग़ जैन

उतरना

मैंने नाव से सीखा है कि तरने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है उतरने से! ✍️ चिराग़ जैन

उजाला

दीपक ने दिखाया- “मौन रहकर काम करो दीर्घायु हो जाएगा उजियारा।” पटाखे ने सिखाया- “धमाका करो शोर मचाओ! रौशनी से ज़्यादा ज़रूरी है रौशनी की गूँज।” मैं समझ गया कि मानवता क्यों रोकना चाहती है युद्ध क्यों सजाना चाहती है आरती। ✍️ चिराग़...

अहंकार

स्वाभिमान जब दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करने लगे, तब वह कोरा अभिमान बनकर रह जाता है। ✍️ चिराग़...

अथाह

‘अथाह’ होने की आकांक्षा ही जीवन में ‘आह’ के अध्याय का ‘अथ’ बन जाती है। ✍️ चिराग़ जैन
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