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वतन के नाम

अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे ✍️ चिराग़...

यादों के ताजमहल में

मैंने मुस्कानें भोगी हैं अब मैं ग़म भी सह लूँगा स्मृतियाँ दिल में उफनीं तो आँसू बनकर बह लूँगा तुम सपनों की बुनियादों पर रँगमहल चिनवा लेना मैं यादों के ताजमहल में शासक बनकर रह लूँगा ✍️ चिराग़...

वो भी दीपक ही है

ये अंधेरा दिए से डरता है या फ़क़त एहतराम करता है वो भी दीपक ही है जो सारा दिन रात होने की दुआ करता है ✍️ चिराग़...

तनहा रोते हैं

जीवन बीता घातों में प्रतिघातों में दौलत की शतरंजी चाल-बिसातों में दुनियादारी के ही वाद-विवादों में अब तनहा रोते हैं काली रातों में जिस धरती पर सम्बन्धों को उगना था हम उस पर दौलत की फसल लगा आए जिन आँखों में सीधे-सादे सपने थे उनको दौलत का अरमान थमा आए एक अदद इन्सान...
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