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पाठ्य पुस्तक से मुठभेड़

दिल्ली विश्वविद्यालय में नये पाठ्यक्रम लागू हो गये हैं। चार साल वाला। कल स्नातक स्तर की हिंदी की पाठ्य पुस्तक से मुठभेड़ हो गयी। कहने लगी मैं साहित्य की पुस्तक हूँ। सुनकर मेरे भीतर के साहित्यिक ने कनखियों से एकाध पृष्ठ उघाड़ दिये। ये इत्तेफ़ाक़ ही था कि जो पृष्ठ खुला उस...

डर लगता है

सूप पर अनाज उछालती माँ डाँट देती थी मुझे जब मैं कोशिश करता था उछलते अनाज को छू लेने की। डाल पर बैठी चिड़िया फुर्र से उड़ जाती थी जब मैं उचकता था उसे छूने के लिए। कई बार मन करता है तुमको छूने का। लेकिन डर लगता है कहीं तुम अनाज न निकलो! कहीं तुम चिड़िया न निकलो! ✍️ चिराग़...

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम...

लफंडर-लबाड़ी

चाहती है अगर प्यार जारी रहे मैं लफ़ंडर रहूँ, तू लबाड़ी रहे एक ही शर्त पर है ये मुमकिन अगर मैं कुँआरा रहूँ, तू कुँआरी रहे घर-गृहस्थी के पचड़ों से बचकर रहें तो मुहब्बत का नुक़सान टल जाएगा हो गई चिल्ल-पौं बालकों की शुरू तो हमारा दिवाला निकल जाएगा आशिकी के लिए है ज़रूरी बहुत...
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