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जलन

बूंद बारिश की उसको छूती है मन मेरा ज़ार-ज़ार जलता है मैं उसे प्यार करूं तो बेहतर और लोगों का प्यार खलता है ✍️ चिराग़...

गीत विरह के

जाने क्या-क्या सह के लिक्खे ये जो गीत विरह के लिक्खे मेरा तो बस नाम लिखा है तूने मुझमें रह के लिक्खे ✍️ चिराग़...

हरसिंगार

तुमसे सिंचित कली हौले-हौले खिली चहकी …महकी इतराने लगी। हवाओं में बिखरने लगी उसकी ख़ुश्बू। …अरे! तुम रूठ क्यों गए हरसिंगार? काॅम्प्लेक्स में आ गए हो क्या? बर्दाश्त न हुई अपने जने की ख़ुश्बू? भार लगने लगा अपना ही अंश? तुम्हारी तो कीर्ति ही बढ़ाता था! वरना कौन...

आग्रह

आग्रह एक जंक्शन है यहाँ से संबंध बदल सकता है गाड़ी… घृणा के लिए भी घनिष्ठता के लिए भी विस्तार के लिए घुटन के लिए भी… हर जगह की गाड़ी है हुज़ूर आपको कहाँ का टिकट चाहिए? ✍️ चिराग़...
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