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लहरें शोर मचाती हैं

गहराई में जाकर बिल्कुल चुप हो जाती हैं और किनारे आकर लहरें शोर मचाती हैं लहरें पल भर में जीवन का सार बताती हैं जिसमें से उठती हैं उस में ही मिल जाती हैं जब उस अनुपम प्रथम मिलन की यादें आती हैं नम होते हैं अधर और पलकें मुस्काती हैं साहिल केवल कचरा ही देता है सागर को...
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