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प्रेम से भीगा हृदय

लाख अवगुंठन छिपाएँ प्रीत का मुखड़ा कुछ झलक तो आएगी ही आवरण के पार जब हृदय में नेह के बिरवे नए पल्लव संजोएँ और आकर्षण खिले मन में सुवासित गंध लेकर तब नयन की कोर पर आकर ठहरता है निवेदन श्वास जाती है प्रिये के द्वार तक संबंध लेकर भावनाओं का अनूठा-अनलिखा यह गीत है हर इक...

होली

सबके जीवन में भरें पावनता के रंग ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़ भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़ ✍️ चिराग़...
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