Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
लाख अवगुंठन छिपाएँ प्रीत का मुखड़ा
कुछ झलक तो आएगी ही आवरण के पार
जब हृदय में नेह के बिरवे नए पल्लव संजोएँ
और आकर्षण खिले मन में सुवासित गंध लेकर
तब नयन की कोर पर आकर ठहरता है निवेदन
श्वास जाती है प्रिये के द्वार तक संबंध लेकर
भावनाओं का अनूठा-अनलिखा यह गीत
है हर इक भाषा नियम और व्याकरण के पार
जब किसी के शब्द मन में मंत्र बनकर गूंजते हों
और उसके पार मन का मृग कुलाचें भर न पाए
हर गगन, सागर, क्षितिज, अनहद सिमट आए उसी में
कल्पना उस गात तक पहुँचे तो फिर वापस न आए
प्रेम से भीगा हृदय जी ही नहीं सकता
एक पल भी नेहमय वातावरण के पार
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हमारा दिल था बहुत बेक़रार बरसों तक
किसी ख़ुशी का रहा इंतज़ार बरसों तक
जो एक पल तमाम दर्द को भुला देगा
उसी की आस पे थे ख़ुशगवार बरसों तक
वो मुझसे रू-ब-रू हैं, जिनका मुंतज़िर था मैं
ये पल करेगा मुझे अश्क़बार बरसों तक
तमाम मयक़दों का सारा नशा बेमानी
वो देख लें तो न उतरे ख़ुमार बरसों तक
ये क्या तिलिस्म किया तुमने इक दफ़ा छूकर
ख़याले-वस्ल रहा बरक़रार बरसों तक
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
सबके जीवन में भरें पावनता के रंग
ऐसी रंगत लाए अब, होरी अपने संग
अब ऐसे मनने लगा, होली का त्यौहार
चेहरे स्याह-सफेद हैं, रंगे हुए अख़बार
भूले से भी मत करो, पॉवर का मिस-यूज़
भस्म हो गई होलिका, उड़ा पाप का फ्यूज़
✍️ चिराग़ जैन