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हालात

अब तो अपने ही उसूलों से लड़ना पड़ता है सच को बाज़ार में नीलाम करना पड़ता है अब नहीं बहते हैं आँसू किसी जनाज़े पर हालतन मर्सिया हर रोज़ पढ़ना पड़ता है ✍️ चिराग़...
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