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प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

आहट

वो तुमसे मेरी पहली मुलाक़ात थी और सिर्फ़ तुम जानती थीं कि आख़िरी भी…! स्टेशन पर खड़े चिड़चिड़ा रहे थे सभी लोग कि ट्रेन लेट क्यों हो रही है और हर आहट के साथ सहम जाता था मैं -’हाय राम! कहीं गाड़ी तो नहीं आ रही!’ ✍️ चिराग़...
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