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चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ जब...

बिटिया

शादी का जोड़ा चढ़ा, सजे सोलहों साज इक छोटी-सी लाडली, बड़ी हुई है आज विदा समय बाबुल कहे, जोड़े दोनों हाथ मेरी लाज बंधी हुई, बिटिया तेरे साथ बिन कारण ताने सहे, बिन मतलब संत्रास पर उसने तोड़ा नहीं, बाबुल का विश्वास बाबुल तेरी देहरी, जब से छूटी हाय। तब से मन की बात बस, मन ही...

सावन

घन, पंछी, बरखा करें, गर्जन, कलरव, सोर हृदय मयूरा झूमिहै, ज्यों सावन में मोर जब मेघन का नेह जल, बरसत है चहुँ ओर इस प्रेमी मन भीगता, उत बिरहन की कोर ✍️ चिराग़...

तिरंगा

अपना तिरंगा एक परचम ही नहीं है भावनाओं की बहार-सी है तीन रंग में छोटे-छोटे बालकों के अधरों पे बिखरी जो वही एक पावन हँसी है तीन रंग में प्रेम, त्याग, एकता, अखण्डता, समानता से ओत-प्रोत आत्मा बसी है तीन रंग में खादी वाले मोटे रेशों का ही ताना-बाना नहीं भारत की एकता कसी...
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