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शोर शराबा क्यों है

रे सागर! सच-सच बतला दे इतना शोर शराबा क्यों है भीतर तो चुप-चुप रहता है तट पर मार दिखावा क्यों है मीठी नदिया के पानी को, तू है इतना प्यारा सागर वो तो तुझमें डूब गई पर, तू ख़ारा का ख़ारा सागर इन लहरों में इक नदिया की कलकल का परछावा क्यों है दिन भर सूरज की गर्मी का चुप-चुप...
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