एक अदद किरदार
‘एक अदद किरदार’ में चिराग़ जैन की उन गद्य रचनाओं का समावेश है, जो डायरी, संस्मरण तथा आत्मकथात्मक शैली में रची जा रही हैं। संभव है इस शीर्षक तले संकलित सभी रचनाएं अंततः चिराग़ जैन की आत्मकथा के रूप में पाठकों को प्राप्त हों।
अनुक्रम
जोधपुर का भव्य विवाहोत्सव
जोधपुर जंक्शन से ट्रेन दिल्ली की ओर रवाना हो रही है। दो दिन तक लगातार उत्सव से ऊर्जा बटोरकर अब ज़िंदगी की गाड़ी फिर अपने फिक्स रूटीन पर दौड़ने को तैयार है। कवि-सम्मेलन को एक परिवार की तरह जीनेवाली पीढ़ी के एक शानदार पुरोधा, मेरे अग्रज श्री शैलेश लोढ़ा जी की बिटिया स्वरा के विवाह समारोह का संयोग...
परवानू : एकाकी मन का संगीत
परवानू से केबल कार में सवार होते ही रस्सियाँ हमें मोक्ष की ओर ले चलीं। मन आजकल अध्यात्म की यात्रा पर है, इसलिए ऐश्वर्य की वीथियों पर भी दृष्टि को दर्शन का योग मिल ही जाता है। रूम चेक-इन करके बालकनी का दरवाज़ा खोला तो यकायक अपने आपको शिवालिक की पहाड़ियों से कुछ ऊँचा महसूस किया। सामने प्रकृति का...
पुरुषोत्तम: एक मंचन जिसकी पटकथा नहीं लिखी गई
हुई है वही, जो राम रचि राखा मुझे अक्सर ऐसा अनुभव होता है कि मैं एक ऐसी स्क्रिप्ट जी रहा हूँ, जिसमें मेरे लिए एक शानदार पार्ट लिखा गया है। ऐसा लगता है कि जीवन अलग-अलग किस्सों का एक पोथा है, जो अपनी बेहतरीन बुनावट के कारण एक उपन्यास सरीखा जान पड़ता है। आइए, इस पोथी के कुछ पृष्ठ पलटता हूँ। वर्ष 2017...
आचमन
आचमन, हिन्दी की वाचिक परम्परा का एक ऐसा नया पौधा है जो अपने शैशव काल में ही नन्हें अंकुरों के लिए वटवृक्ष की भूमिका निर्वाह कर रहा है। जिस दौर में कवि सम्मेलन की सरलता पर अव्यवस्थित चमक-दमक का आधिपत्य स्थापित होने लगा हो, उस दौर में सुव्यवस्थित सादगी से कवि सम्मेलन के मंच को कविता योग्य बनाने का...
कविता सुनने की तमीज़
शेर कहने का सलीक़ा तो ज़रूरी है मगर शेर सुनने के भी आदाब हुआ करते हैं कविता सुनने वाले अगर कविता की हर पंक्ति से प्रस्फुटित रश्मियों के पीछे दौड़कर अर्थ के असंख्य बिम्ब देख पाएं तो कविता-पाठ करने वाले को आनंद आ जाता है। कवि की भावभूमि का पर्यटन यदि श्रोता न कर पाए, तो कविता-पाठ नाद बनने की बजाय...
राजू श्रीवास्तव की अंत्येष्टि
आर्टिस्ट ग्रीन रूम में तैयार था मगर इस ज़िन्दगी ने मंच का परदा गिरा दिया जिजीविषा की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद ठहाके का हिचकी में तब्दील होना यकायक पलकें नम कर गया। ऐसा लगा ज्यों किसी ने अचानक हमारे बिल्कुल आसपास की रौनक को वीराने में बदल दिया हो। मृत्यु को बहुत नज़दीक से देखा है, इसलिए भयभीत तो नहीं...
आषाढ़ के दो दिन
एक वर्ष पूर्ण हो गया। आज ही के दिन सुबह दस बजे अपने घर को और घर के दरवाज़े पर खड़ी माँ को जी भरकर निहारने के बाद मैं अस्पताल पहुँच गया था। मेदांता के एक बेड पर मेरा नाम लिख दिया गया था। हाथ पर एक पट्टा बांध दिया गया था, जिसके रहते अस्पताल की अनुमति के बिना सशरीर उस परिसर से बाहर निकलना सम्भव नहीं...
कविता की नयी पौध
मुझे प्यार करनेवालों का कहना है कि मैं बहुत अच्छा लिखता हूँ। सुनकर अच्छा लगता है। मेरे अपनों का मानना है कि मैं सबसे अच्छा लिखता हूँ। सुनकर आश्वस्ति होती है कि मेरे पास मुझे ‘अपना’ माननेवाले ख़ूब लोग हैं। मेरे पाठकों का कहना है कि मुझ जैसा कोई नहीं लिख सकता। सुनकर एक मीठा-सा अहंकार उपजता है। इस...
जनरल विपिन रावत की शहादत
भारतीय शौर्य का शीर्ष लहूलुहान है। एक उड़न-खटोले के ध्वंस ने माँ भारती की गोद को छलनी कर दिया। मृत्यु का यह क्रूर ताण्डव एक क्षण में दर्जन भर शेरों को मिट्टी बना गया। यह दुर्घटना देश को ठगे जाने के एहसास से भर गयी है। ऐसा लग रहा है कि जिन वृक्षों को सींचकर जेठ की धूप के लिए घना किया जा रहा था,...
बुजुर्गों का रुआब
अभी घर से निकला। एक बुज़ुर्ग महिला सड़क किनारे एक ट्री-गार्ड को पकड़कर खड़ी थी। उन्हें शायद किसी सोसाइटी में जाना था लेकिन बिना सहारे के चलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं और ट्री-गार्ड को पकड़े हुए आते-जाते लोगों की ओर कातर दृष्टि से निहार रही थीं। सोसाइटी के बाहर इस समय बहुत तो नहीं, लेकिन थोड़ी...