कोशिश
मैं ‘मन’ लिखने की
कोशिश करता हूँ
….सिर्फ़ कोशिश।
कभी इसका मन
कभी उसका मन
कभी सबका मन
…और कभी-कभी
अपना भी मन।
इतना ही समझ आता है मुझे
कि ‘कोशिश’
और ‘कामयाबी’
उर्दू ज़ूबान के
दो अलग-अलग अलफ़ाज़ हैं!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
मैं ‘मन’ लिखने की
कोशिश करता हूँ
….सिर्फ़ कोशिश।
कभी इसका मन
कभी उसका मन
कभी सबका मन
…और कभी-कभी
अपना भी मन।
इतना ही समझ आता है मुझे
कि ‘कोशिश’
और ‘कामयाबी’
उर्दू ज़ूबान के
दो अलग-अलग अलफ़ाज़ हैं!
✍️ चिराग़ जैन
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