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प्रह्लाद जीवित है

हार भी है, जीत भी है पीर भी है, प्रीत भी है अनवरत इक शोर भी है आपदा घनघोर भी है किन्तु अन्तस् में अमर आह्लाद जीवित है होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है मानता हूँ उत्सवों का दौर थोड़ा कम हुआ है आंधियों से आम्रवन का बौर थोड़ा कम हुआ है किन्तु कलरव ने चहकने की प्रथा...
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