+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

महलों में वनवास

अकथ वेदना करती होगी रह-रहकर परिहास उर्मिल ने बिन कारण भोगा महलों में वनवास धीर धरो मैया वैदेही अनगिन झेले कष्ट भले ही मृग आकर्षण में अंकुर थे स्वर्ण नगर की पीड़ा के ही पल भर का सम्मोहन लाया जीवन भर का त्रास उर्मिल ने बिन कारण भोगा महलों में वनवास हर इक सुविधा द्वार पड़ी...
error: Content is protected !!