Chirag Jain Writings, Geet, Lapete Mein Netaji, Poetry
मुद्दा मिल गया हाई फाई सारे चैनल लग गए
इसमें मोटी है कमाई सारे चैनल लग गए
अभी पूर्ण भी नहीं हुई है, जाँच प्रक्रिया आधी
मगर मीडिया के बुलेटिन में रिया हुई अपराधी
क्या कर लेगी सीबीआई सारे चैनल लग गए
जिसके घर में मौत हुई है उसका लाभ उठाते
नम्बर वन बनने की जिद्द में, आँसू तक बिक जाते
इनको रोको कोई भाई, सारे चैनल लग गए
मुंबई और बिहार पुलिस में तनातनी भी देखी
राजनीति ने इस चौसर पर खुलकर गोटी फेंकी
किसने रोटी नहीं पकाई, सारे चैनल लग गए
किस रिश्ते में क्या दूरी थी, मत पब्लिक में आँको
हर घर में मटियाला चूल्हा, अपना घर भी झाँको
नँगा, जिसकी पूँछ उठाई, सारे चैनल लग गए
इकनॉमी को तंत्र खा रहा, जनता को महंगाई
रोज़गार पर गाज गिरी है, इनकी सुध लो भाई
ख़बरें देती नहीं दिखाई, सारे चैनल लग गए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Lapete Mein Netaji, Poetry
यदि सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा तो
चैनलों पे रोज़ तीन-पाँच कौन करेेगा
पुलिस वुलिस सब ठीक काम कर लें तो
बड़े-बड़े झूठ भला साँच कौन करेगा
न्याय की व्यवस्था संविधान में करी है ऐसी
अब भला साँच पर आँच कौन करेगा
पैंसठ दिनों में बस इतना पता चला है
एक्टर के मामले की जाँच कौन करेगा
✍️ चिराग़ जैन
संदर्भ: सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई
Chirag Jain Writings, Diary, Ek Adad Kirdar, Prose
कलाकार नीलकण्ठ होता है। सारी दुनिया का विष पचाकर उसे जीवित रहना होता है। मुस्कुराते ओंठो के कारण जो आँखों का संकुचन होता है उसमें कितने ही आँसू छिपा लिए जाते हैं। हर सफल कलाकार के निजी जीवन में झाँककर, दुनिया उस पर कीचड़ उछालना चाहती है। लेकिन उसके निजी जीवन के घावों पर मरहम रखने कोई नहीं जाता।
लोग अपने-अपने निष्ठुर निर्णय लेकर अभी भी लिख देंगे कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मैं स्वयं इस बात से सहमत हूँ, लेकिन एक बार, सिर्फ़ एक बार हम अपने समाज को, अपने तंत्र को, अपनी सामाजिकता को और अपनी दुनिया को टटोलकर तो देखें कि किन परिस्थितियों में किसी को मौत ज़िन्दगी से आसान लगने लगती होगी। किन परिस्थितियों में कोई संवेदनशील मन चीख़कर कहता होगा कि – ‘मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया, तुम्हारी है, तुम ही संभालो ये दुनिया!’
अलविदा दोस्त!
मुझे नहीं पता कि तुमने क्या झेला, मुझे नहीं पता कि तुम सही हो या ग़लत, मुझे यह भी नहीं मालूम कि किस स्थिति में तुमने यह कदम उठा लिया। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि तुम्हारी मुस्कुराहट इस बात की गवाही है कि यह क़दम उठाने के लिए तुमने ख़ुद को बहुत मुश्किल से मनाया होगा।
✍️ चिराग़ जैन