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संविधान

धागेनातीनकगधिंन ताल चलती है, पर सुर सारेगामापाधानीसा में समाय के नूपुर छनन छन, घनन घनन घण्ट; मृदंग बजत द्रुम द्रुम द्रुम गाय के पंचम-निषाद तीव्र-कोमल से रंगे राग, दुगुन-तिगुन ताल भेद समझाय के विलग विलग स्वर गान बनते हैं, जब सब एकरूप होते सम पर आय के कभी सब त्याग...
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