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पीड़ा जगनी थी

अन्तस् में पीड़ा जगनी थी, यह निर्धारित था ठेस अपेक्षा से लगनी थी, यह निर्धारित था रत्ना तो बस बानक भर थी, पूरे किस्से में तुलसी को मानस् रचनी थी, यह निर्धारित था ✍️ चिराग़...

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जिन ध्वनियों में सबसे पहले मैंने अपनों को पहचाना गड्ड-मड्ड होकर जो सबसे पहले कानों से टकराईं जिनमें लाड लड़ाकर माँ ने मुझे कलेजे से चिपकाया जिनमें बुआ बलैया लेकर अस्पताल में भी इतराई जिन ध्वनियों की हर स्वर-लहरी में अवलम्बन आशा का है उन ध्वनियों का इक-इक अक्षर केवल...
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