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मेहंदी

सावन की हरियाली उतर आई है हथेलियों पर …महकने लगा है भाग्य! ✍️ चिराग़ जैन

मुहाने तक नहीं पहुँची

किसी की ज़िन्दगी अपने ठिकाने तक नहीं पहुँची किसी की मौत ही वादा निभाने तक नहीं पहुँची बुज़ुर्गों की क़दमबोसी मेरी फितरत रही लेकिन मेरी हसरत कभी उनके ‘सिराने तक नहीं पहुँची ज़माने के लिए जो शख्स घुट-घुट कर मरा आख़िर ख़बर उस शख्स की ज़ालिम ज़माने तक नहीं पहुँची हवा के साथ उसकी...

कोई बिछड़कर मिला है

जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है भले चोट की जिस्म पर...

वनफूल

कुछ ज़र्द से पत्ते थे जो सजकर सँवर गए कुछ फूल जंगलों में ही खिलकर बिखर गए कुछ छाछ की छछिया लिए दुनिया पे छा गए कुछ खीर हाथ में लिए घुट-घुट के मर गए ✍️ चिराग़...

भाग्यवाद

यहाँ प्रारब्ध का लेखा सिकन्दर तक ने भोगा है पड़ोसी की ख़ताओं को समन्दर तक ने भोगा है बहुत चाहा बचाना राम ने रावण को मरने से मग़र जो लिख गया वो तो कलन्दर तक ने भोगा है ✍️ चिराग़...
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