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ग़रीबी

रुके आँसू, दबी चीखें, बंधी मुट्ठी, भिंचे जबड़े इन्हीं के तर्जुमे से मुल्क़ में विस्फोट होता है ये बम रखने का काम अच्छा-बुरा औरों की ख़ातिर है ग़रीबी के लिए तो सिर्फ़ सौ का नोट होता है ✍️ चिराग़...

ख़ुशियों की तस्वीर

मन के आंगन में मुस्कानों की जागीर बनानी है अपने ही हाथों से ख़ुद अपनी तक़दीर बनानी है हम कुछ रंग चुरा लाए हैं ख़ुशियों के गुलदस्ते से इन रंगों से हमको जीवन की तस्वीर बनानी है ✍️ चिराग़...
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