+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

ख़ास लकीरें ग़ायब हैं

जब से कंधों पर कुछ भार पड़ा, तब से हाथ बंधे हैं और ज़जीरें ग़ायब हैं जिसने सख़्त ज़मीं पर चलकर देख लिया उसकी बातों से तहरीरें ग़ायब हैं जाने कैसे तुमने हाथ मिलाया है हाथों की कुछ ख़ास लकीरें ग़ायब हैं बस आईने लटके हैं दीवारों पर और आईनों से तस्वीरें ग़ायब हैं ✍️ चिराग़...

भ्रष्टतंत्र का योग दिवस

विश्व योग दिवस की शुभकामनाएँ। योग पूरी दुनिया में नए आयामों को खोल रहा है किन्तु फिर भी योग के जितने आयामों से हमने पटाक्षेप किया है उसका कोई मुक़ाबला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश भर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। एक बड़ा तबका इन कार्यक्रमों में...

ज़िंदगी है चार पहरों की तरह

कुल मिलाकर ज़िंदगी है चार पहरों की तरह हर किसी का वक़्त चढ़ता है दुपहरों की तरह सांझ को दुल्हन सी सजती है सभी की ज़िंदगी और फिर सूरज ढलक जाता है चेहरों की तरह ✍️ चिराग़...

छल

मैंने भीगी फुलवारी से पूछा- “कोई आया था क्या?” वो बोली- “एक बादल आया था …बरखा बनकर!” ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!