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जीतकर पछता रहे हैं

जब तलक संघर्ष में थे, व्यस्तता के हर्ष में थे दृश्य कितने ही मनोरम, कल्पना के स्पर्श में थे स्वप्न जबसे सच हुआ, उकता रहे हैं हम जीतकर पछता रहे हैं हम जब हमें हासिल न थी, मंज़िल लुभाती थी निरन्तर बाँह फैलाए हमें हँसकर बुलाती थी निरन्तर पर पहुँच कर जान पाए, है निरी रसहीन...

सुख का आमंत्रण

पीड़ा की तैयारी कर लो, सुख का आमंत्रण आया है जब-जब कंचन मृग देखा है, तब-तब इक रावण आया है ईश्वर का अवतार जना है, माता को अभियोग मिलेगा कान्हा जैसा लाल मिला है, आगे पुत्रवियोग मिलेगा नारायण के बालसखा ने निर्धनता के कष्ट सहे हैं वंशी के रसिया जीवनभर, समरांगण में व्यस्त...

उम्मीदों की राह चला हूँ

हर सन्नाटा मुखरित होगा, जब मैं स्वर लेकर पहुँचूँगा उम्मीदों की राह चला हूँ, मैं ख़ुशियों के घर पहुँचूँगा थक कर टूट नहीं सकता हूँ, मुझको श्रम का अर्थ पता है बढ़ने की इच्छा कर देगी, हर मुश्क़िल को व्यर्थ पता है मेरे हाथों की रेखाओं में इतनी कठिनाई क्यों है निश्चित मानो,...
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