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अवतारी बालक

जीवन के जिस मौसम में आँखें सपने पाला करती हैं कुछ रंग-बिरंगी उम्मीदें जब होश संभाला करती हैं पलकों के भीतर कोई अनगढ़ मूरत ढाली जाती है सरगम साँसों की वीणा पर प्रियतम के गीत सुनाती है वो मौसम जिसमें अपने कुछ कानून बनाए जाते हैं वो मौसम जिसमें मिलन-विरह के नग़में गाए जाते...
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