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शिव : साधना सहजता की

शिव… जहाँ पीड़ा और उत्स एकाकार हो जाते हैं। शिव… जहाँ काव्य के नौ रस बिना किसी भेदभाव के एक साथ रहते हैं। शिव… जहाँ सृष्टि के समस्त भावों को प्रश्रय मिल जाता है। शिव… जिसके द्वार किसी के लिए भी बंद नहीं हैं। बल्कि यूँ कहा जाए कि जहाँ द्वार जैसा...
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