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नया साल

नये घटनाक्रम की पोटली समय के कंधे पर लटकाये एक और नया साल आ खड़ा हुआ है जीवन की पगडंडी पर। बिछाते हुए शुभकामनाओं के फूल इस बार भी स्वागत करेंगे सभी लोग इस अजनबी का अपने-अपने घर में। खोल-खोलकर पोटली में बन्द घटनाओं को शुभ-अशुभ अच्छे-बुरे सुख-दुःख तथा ऐच्छिक-अनैच्छिक का...

नज़र

पलक गिरते ही पल में खेल सारे देख लेता हूँ मैं इनसे आँख को ढँक कर सितारे देख लेता हूँ मेरी ये बन्द पलकें दूरबीनों से कहाँ कम हैं मैं इनमें ज़िन्दगी भर के नज़ारे देख लेता हूँ ✍️ चिराग़...

जनता की लूट

क्रूर काल ने गुरुग्राम की एक दम्पत्ति की गोद सूनी कर दी और अस्पताल ने उनकी जेब काट ली। इस देश में कुछ बुनियादी आवश्यकताएं जनता की लूट का माध्यम बन गई हैं। चिकित्सा में सरकारी तंत्र की नाकामी का लाभ अस्पताल उठाते हैं और कई कई दिन तक शव को वेंटिलेटर पर रख कर बिल बढ़ाते...

पाप

सिर्फ़ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शाइरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झूठ कहना मौत था और अब...

रामसेतु

इन नासमझों का होगा नहीं रे कल्याण रामधरा पर मांग रहे हैं रामलला के प्रमाण श्रीराम बसे हैं आंगन में, पावन तुलसी की क्यारी में श्री राम बसे हैं घर-घर में, आपस की दुनियादारी में श्रीराम हमारी आँखों में, श्रीराम हमारे सपनों में श्रीराम हैं सारे संबंधों में, सब रिश्तों...
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