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ख़ास लकीरें ग़ायब हैं

जब से कंधों पर कुछ भार पड़ा, तब से हाथ बंधे हैं और ज़जीरें ग़ायब हैं जिसने सख़्त ज़मीं पर चलकर देख लिया उसकी बातों से तहरीरें ग़ायब हैं जाने कैसे तुमने हाथ मिलाया है हाथों की कुछ ख़ास लकीरें ग़ायब हैं बस आईने लटके हैं दीवारों पर और आईनों से तस्वीरें ग़ायब हैं ✍️ चिराग़...

फ्रेंडशिप

“भाई नी है… दिखा दे ना।” उसने मेरे ठीक पीछे वाले बेंच पर से फुसफुसा कर कहा। मैं थोड़ा सा सरक गया। “साले ढंग से दिखा वरना रहने दे।” “अबे तो मैं अपना न लिखूँ।” “अच्छा बस एक मिनिट।” “एक बार में देख ले, फिर नहीं...
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