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गुड्डी

गुड्डी के पापा लन्च में टिफ़िन खोलते समय मूंद लेते हैं आँखों को क्योंकि देख नहीं पाते हैं रोटियों से झाँकते तवे के सुराखों को। ईमानदार क्लर्क समझ नहीं सकता है क़िस्मत की गोटियों को इसलिए चुपचाप निगल लेता है बोलती हुई रोटियों को। गुड्डी अक्सर लेट पहुँचती है स्कूल नहीं...

क्या हम हिन्दुस्तानी हैं?

क्या आपने हिन्दुस्तान को देखा है ग़रीबी से सिसकती जान और भूख से निकलते प्राण को देखा है? …ज़रूर देखा होगा बरसात में फुटपाथ पर भीगता हुआ हिन्दुस्तान जिसे पास भीगने को सिर है पर छिपने को घर नहीं है। जिसने अपने चीथड़ों के एक-एक रेशे को उधड़ते हुए देखा है। क्या आपने...
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