+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

चांद का किरदार

एक पल सूरज छिपा और फिर उजाला हो गया लेकिन इसमें चांद का किरदार काला हो गया साज़िशें सूरज निगलने की रची थीं चांद ने पर वो अपनी साज़िशों का ख़ुद निवाला हो गया ✍️ चिराग़...

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

सितारों की तरह

हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह जो चले थे काम करने कामगारों की तरह वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ और मेरे...
error: Content is protected !!