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विदूषकों से प्रदूषकों तक

हमारा समाज मुद्दतों से गालियों को यत्र-तत्र प्रयोग करके व्यर्थ करता रहा है। पहली बार एक पूरी पीढ़ी ने इन मूल्यवान शब्दों की कीमत समझकर इनका बाकायदा एक प्रोफेशन के रूप में सदुपयोग करना सीखा है। गालियों के बूते बाकायदा एक ऐसी विधा डेवलप हुई है, जिसमें छोटे-बड़े,...
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