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गए साल को सलाम

ऐ गये साल तुझे मैं न भूल पाऊंगा तू मेरे कितने ही ख़्वाबों को सच बना के गया तू मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशनसीबी ला के गया मैं क्या गिनाऊँ, तेरे पहले क्या न था मुझमें मैं क्या बताऊँ, तूने क्या सुक़ूं भरा मुझमें जो तुझसे पहले मिला था, वो कुछ छिना भी है मेरे वजूद मेें ‘कुछ’ ख़ैर...

राम: भारतीय संस्कृति की आत्मा का एक नाम

राम… एक ऐसा नाम, जिसका उच्चारण जितने गहरे स्वर में किया जाए, मन उतना ही आराम पाने लगता है। राम… एक ऐसा नाम, जिसको पुकारने के लिए किसी विशेष मनोदशा की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो हर परिस्थिति के अनुरूप लय धारण करने में सक्षम है। जिसका उच्चारण यकायक किसी साकार की...

ऊँचाइयाँ

केवल दूरियाँ तय करते हैं समतल रास्ते ऊँचाइयाँ हासिल करने के लिए चलना ही नहीं चढ़ना भी पड़ता है। ✍️ चिराग़...

उजाला हो गया

हर तरफ़ तन्हाइयों का बोलबाला हो गया सर्दियों में रात का मुँह और काला हो गया कर दिया डर के हवाले जब अंधेरे ने मुझे मैंने अपना डर जलाया और उजाला हो गया ✍️ चिराग़...

सृजन की एक समर्थ साधिका: डॉ. कीर्ति काले

कवि होने की न्यूनतम अर्हताओं में एक अदद मन की आवश्यकता होती है। और मन भी साधारण नहीं; बल्कि ऐसा मन, जिसका करुणा-कोष अक्षय हो। जिसकी कल्पना का आकाश दिखाई तो सबको दे, लेकिन उस तक पहुँचना सहज संभव न हो। जिसकी दृष्टि विहंगम हो। जिसकी आकांक्षाओं में समस्त सृष्टि के लिए शुभ...
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