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कर्ता का सम्मान

कर्ता का सम्मान कहां है ऐसा यहां विधान कहां है राम-कृष्ण हैं, हर मंदिर में तुलसी या रसखान कहां है ✍️ चिराग़...

निस्पृह

तुम हर बार तलाश लेती हो कोई नई वजह नकारने की। …और मैं हर बार बिना वजह स्वीकार लेता हूँ मन ही मन। हर बार बदल जाता है तुम्हारा बहाना …और मैं हर बार बिना वजह कर बैठता हूँ गुज़ारिश। मैं हर बार रहता हूँ वैसा का वैसा क्योंकि मैंने कभी तलाशी ही नहीं कोई वजह...

तनाव की आदत

भली कहाँ है भला ये तनाव की आदत ज़रा-सी बात से आँखों में ताव की आदत हरेक राह से मंज़िल तलक़ पहुँचता है नहीं चुनाव पे निर्भर बहाव की आदत माँ ने चीज़ें भी सहेजी सदा रिश्तों की तरह हमने अपनाई नहीं रखरखाव की आदत कभी ये देश धड़ी में हिसाब करता था सभी को पड़ गई है आज पाव की आदत...
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