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गीत की चेतावनी

आज फिर एकांत की उंगली पकड़कर सोच को अपनत्व की बाँहों में भरकर कोई बोला प्राण का संगीत हूँ मैं ठीक से पहचानिए ना, गीत हूँ मैं अक्षरों के वस्त्र ओढ़े हैं बदन पर भंगिमा में भाव का विस्तार देखो शब्द के आभूषणों से हूँ अलंकृत नयन में रस की अलौकिक धार देखो मैं सुदामा की...

कविता और सत्ता

पौराणिक सन्दर्भों से लेकर आज तक गुरुकुल और कविता ने सत्ता का निर्देशन किया है। चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त हो या सिकंदर सरीखा विश्वविजेता; सभी ने गुरुकुल की तर्जनी का सम्मान किया है। यह व्यवस्था इसलिए भी अपरिहार्य है कि सत्ता जनभावना से सीधे संपर्क में नहीं रह पाती।...

अमर पंक्तियों का व्याकरण

किसी पंक्ति में ऐसा क्या विशेष होता है कि वह अचानक युगजयी हो जाती है! हज़ारों-लाखों लोगों ने पूरा-पूरा जीवन लगा दिया काव्य रचने में, लेकिन पूरी दुनिया में उंगली पर गिने जाने योग्य कविताएँ ही अमर हुई हैं। और जो अमर हुई हैं उन पंक्तियों के शब्द शिल्प में कुछ असाधारण...

गीत गढ़ने का हुनर

मसख़रों की मसख़री अपनी जगह शायरों की शायरी अपनी जगह गीत गढ़ने का हुनर कुछ और है मंच की बाज़ीगरी अपनी जगह ✍️ चिराग़...

कविता

ज्वार भावनाओं का जो मन में उमड़ता है, तब आखरों का रूप धरती है कविता आस-पास घट रहे हादसों की कीचड़ में कुमुदिनी बन के उभरती है कविता प्रेयसी के रूप में सँवरती है कविता; औ शहीदों की अरथी पे झरती है कविता लोग मानते हैं काग़जों पे लिखी जा रही है, कवि जानते हैं कि उतरती है...
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